अशीष जदली – उत्तराखंड को प्राचीन काल से ही देवभूमि के नाम से जाना जाता रहा है, यंहा पर पग-पग पर मिलने वाले मन्दिर, मठ, धाम और शिवालय हर समय यहां की महता को उजागर करते नजर आते हैं, चलिए आपको आज ऐसे ही एक पवित्र धाम कोटद्वार स्थित श्री सिद्धबली बाबा के दर्शनों के लिए ले चलते हैं, जो पौडी जनपद के कोटद्वार में कौमुद नदी के तट पर स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु सिद्ध बाबा के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं बतातें चले कि परमपावन धाम श्री सिद्धबली बाबा मंदिर दिल्ली से लगभग 230 कि.मी. दूर एवं हरिद्वार से 60 कि.मी. दूर व नजीबाबाद जंक्शन से 30 कि.मी. दूर, उत्तराखंण्ड प्रदेश के पौडी जिले के कोटद्वार शहर में स्थित है, यह स्थान तीन तरफ से वनों से ढका हुआ रमणीय व पूज्य स्थान हैं यह स्थान श्री सिद्धबाबा (गुरु गोरखनाथ एवं उनके शिष्यों) का तपस्थान रहा है, श्री सिद्धबली बाबा मंदिर कौमूद नदी (खोह नदी) के तट पर स्थित है, और शिवालिक पहाडियों से घिरा हुआ है, यह मंदिर कुछ वर्ष पूर्व, भूस्खलन के कारण एक तिहाही तक ध्वस्त हो गया था, लेकिन आश्चर्य जनक रूप से अपने स्थान पर ही टिका रहा, और आज भी शहर के ऊंचाई में अपनी शान के साथ स्थित है, ऐसी मान्यता है कि जीर्ण अवस्था के समय, स्वयं हनुमान जी ने मंदिर को अपने कन्धों पर सहारा दिया था, यहाँ पर भक्तों द्वारा विश्वास किया जाता है कि जो भी पवित्र भावना से कोई मनोती श्री सिद्धबली बाबा से मांगता है, अवश्य पूर्ण होती है, मनोती पूर्ण होने पर यहां पर भक्तजन भण्डारा आदि करते हैं, इतना ही नहीं श्री सिद्धबली बाबा को बरेली, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बिजनौर, हरिद्वार आदि तक की भूमि का क्षेत्रपाल देवता के रूप में भी पूजा जाता है, यहाँ पर रविवार, मंगलवार एवं शनिवार को भण्डारे करने की परम्प्रा है साथ ही रविवार को भण्डारा करने की विशेष महत्व है, और यहां पर श्रद्धालुओं की मनोती के पूर्ण के बाद उनके द्वारा आयोजित भण्डारे की बुकिंग भी कई वर्ष आगे तक हो जाती है, श्री सिद्धबली बाबा को आटा, गुड़, घी, भेली से बना रोट एवं नारियल का प्रसाद चढ़ता है एवं हनुमान जी को सवा हाथ का लंगोट व चोला भी चढ़ता है, प्रातरू ब्रमुहर्त में पुजारियों द्वारा पिण्डियों (जिनकी पूजा स्वयं सिद्धबाबा जी शिव शक्ति के रूप में करते थे) की अभिषेक पूजा की जाती है, तत्पश्चात् सर्वप्रथम साधुओं द्वारा बनाये गये रोट (गुड़, आटा व घी से बनी रोटी) का भोग चढ़ता है, तत्पश्चात् ही अन्य भोग चढ़ते हैं, दिसम्बर माह में पौष संक्रान्ति को श्री सिद्धबाबा का तीन दिवसीय विशाल मेला लगता है, जिसमें लगातार तीन दिन तक बड़े भण्डारे आयोजित होते हैं एवं सवा मन का रोट प्रसाद स्वरूप बनाया जाता है।

मन्दिर के पण्डितों के मुताबिक सिद्धबली मन्दिर काफी पौराणिक मन्दिर है, यहां पर गौरखनाथ जी ने तप किया था, तब यहां पर हनुमान जी ने अपने दर्शन दिए थे, हनुमान जी से विनती कर गोरखनाथ जी ने हुनमान जी से सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने की विनती की गयी तब से यहां पर हुनमान जी सब भक्तों की मनोती पूर्ण करते हैं, श्रद्धालुओं के मुताबिक वह हर समय सिद्ध बाबा के दर्शन कर पूजा अर्चना करते हैं, मनोती मांगते हैं, उनकी सिद्धबाबा पर पूरी आस्था है, और जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो यहां पर भण्डारें का आयोजन भी करते हैं कोटद्वार शहर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं कोटद्वार का सिद्वबली बाबा धाम जो सदियो से ही लोगो की आस्था का केन्द्र रहा है, जहां दूर-2 से लोग दर्शनो के लिये आते है ओर मनते मांगते है और मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में भंडारे का आयोजन भी करते हैं, किवदंती हैं कि कि गुरु गौरखनाथ ने इस स्थान पर तपस्या कि थी ओर दुसरी किवदंती यह भी है कि जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी थी तो हनुमान जी संजीवनी बूटी लाते हुए इस स्थान पर थोडा विश्राम करने को रूके थे, और यहां पर उन्होने कालवी राक्षस का वध भी किया था जिस कारण ही इस पवित्र धाम में हनुमान जी की पूजा अर्चना की जाती हैं। मंदिर के प्रबंधक के मुताबिक सिद्ववली धाम में श्रधालु जनो की इतनी आस्था है कि सन 2023 तक इस मंदिर में भंडारे की एडवास बूकिग हो गई वहीं श्रद्धालुओं के मुताबिक मंदिर में सच्चे मन से दर्शन करने में मन को सुकून मिलता हें ओर सच्चे मन से मनोती मंगने पर अवश्य ही मनोकामना पूरी होती हैं तभी तो यहां दूर-2 से लोग दर्शनो के लिये आते हैं।
बाइट – शैलेष जोशी, प्रबन्धक सिद्धबली मन्दिर।
एफ वी ओ – उत्तराखंड को देव भूमी के नाम से पुकारा जाता है, पौराणिक काल से ही यहां पर आस्था पूरी तरह विद्धमान है, उत्तराखंण्ड में प्रमुख चार धामों के साथ साथ हर इलाकों में प्रसिद्ध मन्दिर, शिवालय, मठ और धामों के विराजमान होने से यहां की महता अपने आप ही उजागर होती है और इनमें कोटद्वार नगर स्थित सिद्धबली धाम भी अपनी अलग महता को लेकर काफी विख्यात है, तभी हर समय यहां पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता नजर आता है जो सिद्धबली बाबा के दर्शनों के लिए पहुंचकर बाबा से मनोती मांगते हैं और मनोती के पूर्ण होने पर यहां पर भण्डारे का आयोजन करते हैं।
समाप्त।

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