देहरादून: उत्तराखंड के राज्य सहकारी बैंक में रिक्त चल रहे लिपिक संवर्ग से ऊपर के 380 पदों पर इसी वित्तीय वर्ष में नियुक्तियां की जाएंगी। सहकारिता राज्यमंत्री डा.धन सिंह रावत की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। तय किया गया कि इन पदों के लिए के इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (आइबीपीएस) के माध्यम से परीक्षा कराई जाएगी। वर्ग चार और तीन के पदों पर नियुक्तियों के संबंध में बैंकों के बोर्ड निर्णय लेंगे।

विधानसभा स्थित कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सहकारिता राज्यमंत्री डा. रावत ने कहा कि आइबीपीएस के माध्यम से पहले भी पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां कराई गई थीं। अब फिर से उसे यह जिम्मा सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में भी राज्य के सभी जिला सहकारी बैंक लाभ में हैं। उन्हें राष्ट्रीयकृत बैंकों से प्रतिस्पर्धा के लिए सुविधाएं बढ़ानी होंगी। इसी कड़ी में सहकारिता के तहत सभी पैक्स समितियों का कंप्यूटराइजेशन, जिला सहकारी बैंकों का अपना डाटा बैंक और सीबीएस सिस्टम पर फोकस किया गया है। साथ ही राज्यभर में जिला सहकारी बैंकों की 72 नई शाखाएं खोलने और 100 एटीएम स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।

सहकारिता राज्यमंत्री डा.धन सिंह रावत के अनुसार जिला सहकारी बैंकों का डाटा सेंटर जल्द स्थापित करने के लिए टीसीआइएल को निर्देश दिए गए हैं, ताकि 15 जुलाई तक मुख्यमंत्री इसका उद्घाटन कर सकें। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर को आने वाले 20 वर्षों की क्षमता को देखकर बनाया जाएगा।

सहकारिता राज्यमंत्री डा.धन सिंह रावत ने बताया कि केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड ने सभी राज्यों से सहकारिता में टू या थ्री टायर व्यवस्था के संबंध में सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्य और सहकारिता के हित को ध्यान में रखकर जल्द फैसला लिया जाएगा। इस क्रम में सभी जिला सहकारी बैंकों की वार्षिक सामान्य सभा बुलाकर सुझाव लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्य में थ्री-टायर (पैक्स, जिला व राज्य सहकारी बैंक) व्यवस्था है। पूर्व में प्रत्येक जिले में पैक्स समितियों की जांच कराई गई। अभी तक 30 कार्मिकों का निलंबन किया गया, जबकि 13 की संपत्ति कुर्क करने के आदेश हुए हैं।

सहकारिता राज्यमंत्री डा.धन सिंह रावत के अनुसार सहकारी बैंकों के एनपीए (गैर निष्पादित आस्तियां) की वसूली का 60 फीसद लक्ष्य हासिल किया गया है। इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने उत्तराखंड की तारीफ करते हुए अन्य राज्यों को भी इसी तरह कदम उठाने को कहा है। डा.रावत ने बताया कि प्रदेश में किसी भी किसान से एनपीए नहीं वसूला गया। सिर्फ एक करोड़ से अधिक की बकाया राशि वाले 76 व्यक्तियों से एनपीए की वसूली की गई।

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